BHARATPOL Portal क्या है? जानिए कैसे यह इंटरपोल से जुड़कर भारतीय पुलिसिंग में डिजिटल क्रांति ला रहा है

BHARATPOL Portal: भारत की पुलिस को इंटरपोल से जोड़ने वाली डिजिटल क्रांति

BHARATPOL Portal: भारत की पुलिस को इंटरपोल से जोड़ने वाली डिजिटल क्रांति

मुख्य बिंदु: BHARATPOL (Broadcast Hub for Assistance and Real-Time Action against Transnational Crimes) वह पोर्टल है जिसने भारतीय पुलिस की अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। 7 जनवरी, 2025 को लॉन्च हुए इस पोर्टल ने इंटरपोल तक पहुंच को सिर्फ सीबीआई तक सीमित न रखकर पूरे देश की पुलिस के लिए खोल दिया है।

BHARATPOL क्या है?

BHARATPOL एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो भारत की सभी 51 केंद्रीय और राज्य पुलिस एजेंसियों को सीधे इंटरपोल के वैश्विक नेटवर्क से जोड़ता है। पहले केवल सीबीआई के पास ही इंटरपोल से सीधे संपर्क का अधिकार था, लेकिन अब कोई भी राज्य पुलिस अधिकारी इस पोर्टल के जरिए इंटरपोल की सेवाओं का लाभ उठा सकता है।

क्यों जरूरी था BHARATPOL?

पुरानी व्यवस्था की कमियां

BHARATPOL से पहले की प्रक्रिया बेहद धीमी और जटिल थी:

  • समय लंबा: रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने में 6 महीने तक लग जाते थे
  • कागजी कार्यवाही: सभी काम ईमेल, फैक्स और चिट्ठियों के जरिए होता था
  • सीमित पहुंच: केवल सीबीआई ही इंटरपोल से सीधे जुड़ सकती थी
  • तालमेल की कमी: अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान मुश्किल था

BHARATPOL के मुख्य लाभ

समय में 50% की कमी

रेड कॉर्नर नोटिस प्रक्रिया: 6 महीने → 3 महीने

मुख्य विशेषताएं:

  • वास्तविक समय में डेटा साझा: अब सूचनाएं तुरंत पहुंचती हैं
  • सीधी पहुंच: हर पुलिस अधिकारी को इंटरपोल डेटाबेस तक सीधी पहुंच
  • मानकीकरण: सभी अनुरोध एक जैसे फॉर्मेट में जाते हैं
  • पारदर्शिता: हर अनुरोध की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं
  • तेज न्याय: Trial in Absentia के साथ मिलकर काम करता है

यह कैसे काम करता है?

एक साधारण उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए महाराष्ट्र पुलिस को एक ड्रग तस्कर का पता चलता है जो थाईलैंड भाग गया है:

  1. पुलिस अधिकारी BHARATPOL पोर्टल में लॉगिन करता है
  2. रेड कॉर्नर नोटिस का फॉर्म भरता है
  3. पोर्टल स्वचालित रूप से फॉर्म को जांचता है
  4. संबंधित अधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर करके मंजूरी देता है
  5. सीबीआई अंतिम जांच के बाद इंटरपोल को भेज देता है
  6. पूरी प्रक्रिया में अब सिर्फ 2-3 सप्ताह लगते हैं

पहले से ही दिख रहे हैं परिणाम

23 भगोड़े

सिर्फ 2024 में ही 23 भगोड़ों को वापस लाया गया

134 भगोड़े

2020-2025 के बीच 134 भगोड़े वापस लाए गए, जबकि 2010-2019 में सिर्फ 74 ही वापस आ पाए थे

भविष्य की ओर

BHARATPOL सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में इसे और विकसित किया जाएगा, जिसमें आम नागरिकों के लिए गुमशुदा व्यक्तियों की रिपोर्ट दर्ज करने की सुविधा, कोर्ट सिस्टम से सीधा जुड़ाव, और एआई आधारित अपराध विश्लेषण जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

निष्कर्ष: BHARATPOL सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह भारतीय पुलिस व्यवस्था में एक मौलिक बदलाव का प्रतीक है। यह दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक से न सिर्फ प्रक्रियाएं तेज हो सकती हैं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ सकती है।

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