BHARATPOL से रेड कॉर्नर नोटिस कैसे तेज हुआ? जानिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया अब 6 महीने से 3 महीने कैसे हुई

BHARATPOL के माध्यम से फास्ट ट्रैक रेड कॉर्नर नोटिस प्रक्रिया

BHARATPOL के माध्यम से फास्ट ट्रैक रेड कॉर्नर नोटिस प्रक्रिया

⏱️ 50% समय बचत

रेड कॉर्नर नोटिस प्रक्रिया: 6 महीने → 3 महीने

रेड कॉर्नर नोटिस क्या है? रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी एक अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट है। यह दुनिया भर की पुलिस को संदेश देता है कि जारी करने वाले देश ने संदिग्ध की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया है और उसे प्रत्यर्पण के लिए पकड़ा जाना चाहिए।

पुरानी बनाम नई प्रक्रिया

🗓️ BHARATPOL से पहले (6 महीने)

चरण 1: मैनुअल डॉक्युमेंटेशन

पुलिस अधिकारी को सभी दस्तावेज मैनुअल तैयार करने होते थे - FIR, चार्जशीट, गिरफ्तारी वारंट

चरण 2: ईमेल/फैक्स के जरिए CBI को भेजना

दस्तावेज CBI के इंटरपोल विंग को ईमेल या फैक्स के जरिए भेजे जाते थे

चरण 3: CBI द्वारा मैनुअल रिव्यू

CBI अधिकारी दस्तावेजों को मैनुअल चेक करते थे, अक्सर कई बार पुनर्जांच की आवश्यकता होती थी

चरण 4> कूरियर के जरिए इंटरपोल को भेजना

CBI इंटरपोल को फॉर्मल रिक्वेस्ट लेटर कूरियर या डिप्लोमैटिक पाउच के जरिए भेजता था

चरण 5: इंटरपोल प्रोसेसिंग

इंटरपोल रिव्यू करता था → प्रकाशित करता था (2-3 महीने बाद)

कुल समय: 4-6 महीने

🚀 BHARATPOL के साथ (3 महीने)

चरण 1: ऑनलाइन फॉर्म भरना

पुलिस अधिकारी पोर्टल में लॉगिन करके स्टैंडर्डाइज्ड RCN टेम्पलेट भरता है

चरण 2: ऑटो-वैलिडेशन

पोर्टल स्वचालित रूप से पूर्णता की जांच करता है, इंटरपोल विनिर्देशों के अनुसार ऑटो-फॉर्मेट करता है

चरण 3: ILO डिजिटल अप्रूवल

SP का ILO पोर्टल के भीतर समीक्षा करता है → डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अनुमोदन करता है

चरण 4: CBI फाइनल रिव्यू

सिस्टम ऑटो-एस्केलेट CBI के ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर को। CBI 48 घंटे में फाइनल लीगल चेक करता है

चरण 5: ऑटोमेटेड इंटरपोल सबमिशन

पोर्टल API के जरिए इंटरपोल I-24/7 को एन्क्रिप्टेड रिक्वेस्ट ट्रांसमिट करता है

चरण 6: त्वरित प्रकाशन

इंटरपोल प्रोसेस करता है → 7-14 दिनों के भीतर प्रकाशित करता है

कुल समय: 2-3 महीने

विस्तृत BHARATPOL रेड कॉर्नर नोटिस वर्कफ्लो

1

यूजर रिक्वेस्ट इनिशिएट करता है

पुलिस अधिकारी BHARATPOL पोर्टल में लॉगिन करता है और नया रेड कॉर्नर नोटिस रिक्वेस्ट शुरू करता है

2

फॉर्म कम्पलीशन

केस डिटेल्स, संदिग्ध जानकारी, सबूत अपलोड करता है। सभी अनिवार्य फील्ड ऑटो-वैलिडेट होते हैं

3

कम्प्लायंस चेक

पोर्टल स्वचालित रूप से कानूनी वैधता, अधिकार क्षेत्र अधिकार, अनिवार्य फील्ड की जांच करता है

4

ILO रिव्यू और ऑथेंटिकेशन

इंटरपोल लियाज़न ऑफिसर रिक्वेस्ट की समीक्षा करता है, डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अनुमोदन करता है

5

CBI ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर

रिक्वेस्ट CBI के ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर को भेजी जाती है। अंतिम कानूनी/प्रक्रियात्मक सत्यापन

6

इंटरपोल I-24/7 को एन्क्रिप्टेड ट्रांसमिशन

पोर्टल API के जरिए इंटरपोल को एन्क्रिप्टेड रिक्वेस्ट भेजता है

7

पोर्टल स्टेटस अपडेट

पोर्टल स्टेटस अपडेट करता है: "SUBMITTED" → "PENDING" → "PUBLISHED" → "RESOLVED"

8

इनबाउंड स्टेटस ब्रॉडकास्ट

इंटरपोल से अपडेट मूल एजेंसी को ऑटोमेटिक ब्रॉडकास्ट होता है

आवश्यक दस्तावेज और मानदंड

रेड कॉर्नर नोटिस के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • गिरफ्तारी वारंट: संबंधित कोर्ट द्वारा जारी वैध गिरफ्तारी वारंट
  • FIR/चार्जशीट: विस्तृत प्रथम सूचना रिपोर्ट और चार्जशीट
  • संदिग्ध की पहचान: फोटो, फिंगरप्रिंट, व्यक्तिगत विवरण
  • सबूत: संबंधित सबूत जो आरोपों का समर्थन करते हैं
  • अपराध का विवरण: अपराध का विस्तृत विवरण और संबंधित IPC धाराएं

मानदंड

  • अपराध गंभीर होना चाहिए (हत्या, बलात्कार, ड्रग तस्करी, आतंकवाद, आदि)
  • संदिग्ध विदेश में होने की पुष्टि या संभावना हो
  • सभी कानूनी आवश्यकताएं पूरी हों
  • कोई राजनीतिक, सैन्य, धार्मिक या नस्लीय आधार न हो

वास्तविक प्रभाव और सफलता दर

संख्याओं में सफलता

CBI रिक्वेस्ट पर जारी रेड नोटिस: 2023 से वार्षिक रूप से दोगुना हुआ

भगोड़ा प्रत्यर्पण दर: 134 वापस लाए गए (2020-2025) बनाम 74 (2010-2019)

2024 अकेले: 23 भगोड़े भारत वापस लाए गए

प्रक्रिया समय: 6 महीने → 3 महीने (50% कमी)

गलत रेड नोटिस से सुरक्षा उपाय

दुरुपयोग रोकथाम तंत्र

  • ड्यूल-अप्रूवल आवश्यकता: हर RCN के लिए कम से कम दो स्तरों की अनुमोदन आवश्यक
  • वारंट सत्यापन: कोर्ट वारंट की डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया
  • रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: असामान्य पैटर्न के लिए इंटरपोल को तत्काल सूचना
  • आंतरिक ऑडिट: सभी RCN जारी करने का त्रैमासिक समीक्षा
  • आपत्ति निवारण: गलत तरीके से नोटिस किए गए व्यक्तियों के लिए त्वरित अपील प्रक्रिया

🚀 BHARATPOL: भगोड़ों के लिए अब कोई सीमा नहीं

तेज रेड कॉर्नर नोटिस प्रक्रिया ने भारत की अंतरराष्ट्रीय अपराधी पकड़ने की क्षमता में क्रांति ला दी है

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