Trial in Absentia क्या है? जानिए BNSS और BHARATPOL की भूमिका कैसे भगोड़ों पर मुकदमा तेजी से आगे बढ़ाती है

Trial in Absentia: BNSS और BHARATPOL की भूमिका

Trial in Absentia: BNSS और BHARATPOL की भूमिका

क्रांतिकारी बदलाव: भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के स्थान पर आई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 ने 'Trial in Absentia' की अवधारणा शुरू की है। इसके साथ ही BHARATPOL पोर्टल ने इस प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Trial in Absentia क्या है?

पुरानी बनाम नई कानूनी व्यवस्था

🗓️ पुरानी CrPC व्यवस्था

मुख्य सीमाएं:

  • भगोड़े आरोपी के मामले में मुकदमा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो जाता था
  • गवाहों के बयान और सबूत समय के साथ कमजोर होते जाते थे
  • पीड़ितों को न्याय मिलने में वर्षों लग जाते थे
  • अपराधी विदेश में सुरक्षित रहकर भारतीय कानून से बच सकते थे
वास्तविक उदाहरण: 2010-2019 के दशक में केवल 74 भगोड़ों को ही वापस लाया जा सका, जबकि सैकड़ों मामले लंबित रहे।

🚀 नई BNSS व्यवस्था

मुख्य लाभ:

  • भगोड़े आरोपी के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा सकता है
  • गवाहों के बयान संरक्षित किए जा सकते हैं
  • अनुपस्थिति में सजा संभव है
  • अपराधी को यह संदेश कि भागने से मुकदमा रुक नहीं जाएगा
वास्तविक उदाहरण: 2020-2025 में 134 भगोड़े वापस लाए गए, और कई मामलों में Trial in Absentia शुरू किया गया।

BHARATPOL की महत्वपूर्ण भूमिका

Trial in Absentia की संपूर्ण प्रक्रिया

1

आरोपी भगोड़ा हो जाता है

मुकदमे के दौरान आरोपी भाग जाता है या विदेश चला जाता है

2

BHARATPOL के जरिए अंतरराष्ट्रीय खोज

पुलिस BHARATPOL पोर्टल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रक्रिया शुरू करती है

3

प्रख्यात अपराधी घोषित

अदालत आरोपी को प्रख्यात अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित करती है

4

Trial in Absentia की अनुमति

अदालत BNSS धारा 356 के तहत Trial in Absentia की अनुमति देती है

5

मुकदमा जारी रहता है

गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं, सबूत पेश किए जाते हैं

6

निर्णय और सजा

अदालत आरोपी के खिलाफ निर्णय दे सकती है और सजा सुन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *